मुख्य सामग्री पर जाएँ

Lunar Eclipse: चंद्रमा का 96% हिस्सा छाया में, 27-28 अगस्त की रात दिखा दुर्लभ नजारा

Written by: 
Published:
5 Min read

संपादकीय समीक्षा

यह लेख MystiSci की संपादकीय प्रक्रिया और नीतियों के अनुसार जाँचा गया है। हमारी टीम ने इस लेख की विश्वसनीयता के लिए इन मानकों का पालन किया है:

  • सत्यापित तथ्य (Fact-checked)
  • वैज्ञानिक समीक्षा (Scientific Review)
  • विश्वसनीय स्रोत (Trusted Sources)
  • प्रूफरीड और सटीक (Proofread)
MystiSci को बनाएं
पर पसंदीदा सोर्स
गहरे आंशिक चंद्र ग्रहण में पृथ्वी की छाया से लाल हुआ चंद्रमा और चमकता हुआ पतला किनारा
गहरे आंशिक चंद्र ग्रहण में पृथ्वी की छाया से लाल हुआ चंद्रमा और चमकता हुआ पतला किनारा
लेख सुनेंAI VOICE
हिंदी ऑडियो
00:00

27-28 अगस्त की रात चंद्रमा का करीब 96 फीसदी हिस्सा पृथ्वी की गहरी अंदरूनी छाया में चला गया। चंद्रमा का ज्यादातर हिस्सा गहरे लाल रंग में दिखाई दिया, जबकि बाहर बचा हुआ एक पतला किनारा तेज रोशनी में चमकता रहा। यही वजह थी कि यह आंशिक चंद्र ग्रहण होते हुए भी लगभग पूर्ण चंद्र ग्रहण जैसा नजर आया।

वॉशिंगटन: 27-28 अगस्त की दरम्यानी रात दुनिया के एक बड़े हिस्से में दुर्लभ आंशिक चंद्र ग्रहण दिखाई दिया। इस दौरान पृथ्वी की गहरी छाया यानी अम्ब्रा चंद्रमा की सतह के करीब 96 फीसदी हिस्से तक पहुंच गई।

चंद्रमा के इस बड़े हिस्से पर सीधे सूर्य की रोशनी नहीं पड़ रही थी। इसके बजाय पृथ्वी के वायुमंडल से होकर छनकर और मुड़कर आने वाली सूर्य की कुछ रोशनी चंद्रमा तक पहुंची। इसी वजह से छाया में गया चंद्रमा गहरे लाल रंग का दिखाई दिया।

ग्रहण के सबसे ज्यादा असर वाले समय में चंद्रमा का सिर्फ एक पतला हिस्सा सीधी धूप में बचा रहा। यह हिस्सा बाकी लाल चंद्रमा की तुलना में कई गुना ज्यादा चमकीला दिखाई देता है, जिससे चंद्रमा का किनारा कुछ कटा हुआ जैसा नजर आता है।

Lunar Eclipse: यह ग्रहण कैसे बना?

आंशिक चंद्र ग्रहण पूर्णिमा के दौरान होता है, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और चंद्रमा पृथ्वी की छाया से होकर गुजरता है।

इस दौरान पृथ्वी की गोल छाया धीरे-धीरे चंद्रमा की सतह पर आगे बढ़ती दिखाई देती है। इस ग्रहण में छाया का गहरा हिस्सा चंद्रमा के बहुत बड़े भाग पर पहुंच गया था।

ग्रहण के चरम पर एक पतली अर्धचंद्राकार पट्टी पर सूर्य की सीधी रोशनी पड़ती रही, जबकि बाकी लगभग पूरा चंद्रमा पृथ्वी की गहरी छाया में था।

यही वजह है कि इसे पूर्ण चंद्र ग्रहण नहीं कहा गया। पूर्ण ग्रहण में चंद्रमा का पूरा दिखाई देने वाला हिस्सा पृथ्वी की अम्ब्रा में चला जाता है।

चंद्र ग्रहण कहां दिखा?

27-28 अगस्त का यह आंशिक चंद्र ग्रहण उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में रहने वाले करीब 3.3 अरब लोगों को दिखाई दिया।

ग्रहण के अलग-अलग चरण दुनिया में देखने वालों के लिए एक ही खगोलीय घटना का हिस्सा थे, लेकिन स्थानीय समय हर जगह अलग था। इसकी वजह यह है कि पृथ्वी के अलग-अलग हिस्सों में चंद्रमा अलग समय पर आसमान में दिखाई देता है।

अमेरिका के वेस्ट कोस्ट पर लॉस एंजिल्स, कैलिफोर्निया और पोर्टलैंड, ओरेगन जैसे शहरों में ग्रहण का सबसे ज्यादा असर वाला समय सूर्यास्त के कुछ घंटे बाद आया।

वहीं न्यूयॉर्क और जैक्सनविले जैसे ईस्ट कोस्ट शहरों में रहने वाले लोगों के लिए ग्रहण का चरम आधी रात के आसपास दिखाई दिया।

भारत में नहीं दिखा ग्रहण

यूके, यूरोप और अफ्रीका के कई हिस्सों में यह ग्रहण सुबह के समय दिखाई दिया। इन जगहों पर ग्रहण के दौरान चंद्रमा पश्चिमी क्षितिज की ओर नीचे जा रहा था और कई इलाकों में यह सूर्योदय से ठीक पहले का समय था।

इसके उलट, जिस समय ग्रहण हो रहा था, पृथ्वी के दिन वाले हिस्से में मौजूद लोगों के लिए चंद्रमा आसमान में दिखाई नहीं दे रहा था।

इसी वजह से भारत, ऑस्ट्रेलिया, चीन और जापान जैसे कई देशों में यह ग्रहण नहीं देखा जा सका।

भारत में ग्रहण दिखाई न देने की मुख्य वजह यही थी कि ग्रहण के दौरान भारतीय उपमहाद्वीप में दिन था।

चंद्र ग्रहण देखने के लिए चश्मे की जरूरत नहीं

चंद्र ग्रहण को देखने के लिए सूर्य ग्रहण की तरह किसी खास सुरक्षा चश्मे की जरूरत नहीं होती।

चंद्रमा से आने वाली रोशनी इतनी तेज नहीं होती कि सामान्य परिस्थितियों में उसे नंगी आंखों से देखने से आंखों को नुकसान पहुंचे। इसलिए चंद्र ग्रहण को सीधे देखा जा सकता है।

हालांकि, दूरबीन या टेलीस्कोप से चंद्रमा की सतह, पृथ्वी की छाया और लाल रंग में बदलते हिस्से को और साफ देखा जा सकता है।

चंद्र ग्रहण कैसे होता है?

चंद्र ग्रहण तब होता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा लगभग एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी सूर्य की रोशनी को चंद्रमा तक पहुंचने से रोकती है।

चंद्रमा जब पृथ्वी की छाया से होकर गुजरता है, तो उसका कुछ या पूरा हिस्सा अंधेरे में चला जाता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि चंद्रमा पूरी तरह गायब हो जाता है।

पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य की रोशनी को मोड़ता है। लाल और नारंगी रंग की रोशनी वायुमंडल से होकर चंद्रमा तक पहुंच सकती है और उसकी सतह को हल्का लाल या गहरा तांबे जैसा रंग दे सकती है।

इसी वजह से पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान दिखाई देने वाले लाल चंद्रमा को आम बोलचाल में ब्लड मून कहा जाता है।

27-28 अगस्त का ग्रहण पूर्ण चंद्र ग्रहण नहीं था, लेकिन चंद्रमा का करीब 96 फीसदी हिस्सा गहरी छाया में चले जाने की वजह से इसका दृश्य पूर्ण ग्रहण के काफी करीब दिखाई दिया।

Advertisements

Editorial Desk
लेखक के बारे मेंEditorial Team

यह लेख हमारी विशेष संपादकीय टीम द्वारा तैयार किया गया है।

और पढ़ें
Share this post:
अगली खबर

FAS रिपोर्ट में भारत के करीब 190 Nuclear Warheads का अनुमान, नए मिसाइल सिस्टम से बढ़ सकता है जखीरा

editorial-desk
|

भारत के परमाणु हथियारों को लेकर Federation of American Scientists यानी FAS का नया अनुमान सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत के पास करीब 190 Nuclear Warheads हो सकते हैं। यह भारत सरकार की आधिकारिक संख्या नहीं है, बल्कि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी, सरकारी आंकड़ों और सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर लगाया गया अनुमान है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत अपने परमाणु हथियारों को ले जाने वाले जमीन, हवा और समुद्र आधारित सिस्टम को लगातार आधुनिक बना रहा है।

भारत की जमीन, हवा और समुद्र आधारित परमाणु प्रतिरोधक क्षमता का वैज्ञानिक दृश्य
अगली खबर

Exoplanets: धरती का विकल्प बन सकते हैं ये 4 ग्रह? जेम्स वेब और केप्लर की खोज ने बढ़ाई उम्मीद

editorial-desk
|

ब्रह्मांड में हमारी पृथ्वी अकेली है या नहीं, यह सवाल अभी भी खुला है। हमारी आकाशगंगा में अरबों तारे हैं और अब तक हजारों Exoplanets यानी दूसरे तारों की परिक्रमा करने वाले ग्रह खोजे जा चुके हैं। इनमें कुछ ऐसे ग्रह हैं जो आकार, तापमान या पानी और वातावरण की संभावित मौजूदगी के कारण वैज्ञानिकों के लिए खास बन गए हैं। लेकिन क्या इनमें से कोई सचमुच पृथ्वी का दूसरा घर हो सकता है? अभी इसका जवाब नहीं मिला है।

चार संभावित रहने योग्य Exoplanets Kepler-452b Kepler-22b Proxima Centauri b और K2-18b का वैज्ञानिक दृश्य
Advertisements
अगली खबर

Solar Eclipse: अगस्त में दिखेगा दुर्लभ पूर्ण सूर्य ग्रहण, जानिए इतिहास के 10 सबसे अहम ग्रहण

12 अगस्त 2026 को आसमान में एक दुर्लभ नजारा दिखाई देगा। चंद्रमा कुछ मिनटों के लिए सूर्य को पूरी तरह ढक लेगा और पूर्ण सूर्य ग्रहण के रास्ते में आने वाले इलाकों में दिन के समय कुछ देर के लिए अंधेरा छा जाएगा। यह ग्रहण आर्कटिक से शुरू होकर पूर्वी ग्रीनलैंड, पश्चिमी आइसलैंड और स्पेन के बड़े हिस्सों से गुजरेगा। लेकिन सूर्य ग्रहण सिर्फ एक खूबसूरत खगोलीय घटना नहीं है—इसके जरिए वैज्ञानिकों ने सदियों से सूर्य, चंद्रमा और यहां तक कि ब्रह्मांड के नियमों को समझने की कोशिश की है।

पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा के पीछे छिपे सूर्य और दिखाई देते कोरोना का वैज्ञानिक दृश्य
अगली खबर

China Moon Mission: चांद के उन अंधेरे गड्ढों में उतरेगा चीन, जहां अरबों साल से जमी है बर्फ

चांद पर पानी होने की बात अब कोई नई खोज नहीं है। असली सवाल यह है कि वह पानी कहां है, कितनी मात्रा में है और क्या भविष्य में उसे वहां से निकाला जा सकता है। चीन का अगला China Moon Mission इसी सवाल का जवाब खोजने के लिए चांद के उन गहरे क्रेटरों तक पहुंचने की कोशिश करेगा, जहां सूरज की रोशनी अरबों साल से नहीं पहुंची है

चीन के चांग’ई-7 मिशन का चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर जल-बर्फ की खोज करते हुए वैज्ञानिक दृश्य